अब Free नहीं रहेगा होर्मुज, ईरान का साफ संदेश, इजरायल को वॉर्निंग- MoU में लेबनान का तीन बार जिक्र
अब Free नहीं रहेगा होर्मुज, ईरान का साफ संदेश, इजरायल को वॉर्निंग- MoU में लेबनान का तीन बार जिक्र
ईरान और अमेरिका के बीच एक बड़ा समझौता (MOU) जेनेवा में होने वाला है. इसमें ईरान की रुकी हुई संपत्ति वापसी, सभी पाबंदियां हटाने और तेल बिक्री की छूट शामिल है. होर्मुज खाड़ी में जहाजों से सेवा शुल्क वसूला जाएगा. लेबनान में जंग पूरी तरह बंद होगी. परमाणु मुद्दे पर अलग से 60 दिनों में बातचीत होगी.

IAEA और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर बरसा ईरान (Photo: Google Earth)
ईरान और अमेरिका के बीच एक बड़ा समझौता होने वाला है. इसे MOU कहते हैं. इस पर जल्द ही जेनेवा में दस्तखत होंगे. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने इस पूरे मामले पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि इस समझौते में क्या-क्या है, ईरान की क्या शर्तें हैं, और अमेरिका को क्या देना होगा. साथ ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने भी इस पर अपनी बात रखी.
इस्माइल बगाई के मुताबिक यह MOU ईरानी लोगों की ‘ऐतिहासिक हिम्मत’ का नतीजा है. पिछले एक साल में अमेरिका और इजरायल का रवैया सही नहीं रहा, लेकिन ईरान ने अपनी जमीन नहीं छोड़ी. अब दोनों देश एक लिखित समझौते पर आए हैं.
12 दिन की जंग का जिक्र
इस्माइल बक़ाई ने साफ कहा कि अमेरिका और इजरायल ने जो ’12 दिन की जंग’ लड़ी, उसके जुर्म ईरान भूलेगा नहीं. यह बात उन्होंने इसलिए कही क्योंकि कुछ लोग सोच रहे थे कि समझौते के बाद सब माफ हो जाएगा.
इस्माइल बक़ाई ने कहा – नहीं, शहीदों का बदला लेना ईरान की स्थायी नीति है, इसे कोई नहीं बदल सकता.
IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी) पर हमला
बक़ाई ने IAEA और उसके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की तीखी आलोचना की. उन्होंने कहा कि इन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने अमेरिका और इजरायल की आक्रामकता की निंदा नहीं की, जो इनके लिए शर्म की बात है. ये संस्थाएं इस परीक्षा में फेल हो गईं.
लेबनान वाली बात
एक पत्रकार ने पूछा कि क्या इजरायल का लेबनान से निकलना भी इस समझौते में लिखा है या सिर्फ युद्धविराम है. बाकेई ने जवाब दिया कि MOU में ‘लेबनान’ शब्द तीन बार आता है. इसमें लेबनान की संप्रभुता का सम्मान, उसकी जमीनी अखंडता और जंग बंद करने की बात शामिल है. यानी यह सिर्फ युद्धविराम नहीं, बल्कि पूरी तरह लड़ाई खत्म करने की बात है.
जेनेवा बैठक से पहले क्या होगा?
बक़ाई ने बताया कि समझौते पर दस्तखत से पहले ईरानी अधिकारी पड़ोसी और क्षेत्रीय देशों का दौरा करेंगे. इन दौरों की पूरी जानकारी जल्द सार्वजनिक की जाएगी. साथ ही दस्तखत का तरीका और प्रक्रिया यानी कौन साइन करेगा, कहां होगा – यह एक-दो दिन में तय हो जाएगा और आधिकारिक तौर पर बताया जाएगा.
ईरान को क्या मिलेगा?
यह समझौते का सबसे अहम हिस्सा है. बक़ाई ने बताया कि अमेरिका को ईरान के जो पैसे विदेश में रोके गए हैं, वो वापस करने होंगे. नुकसान का हर्जाना देना होगा. सभी आर्थिक पाबंदियां हटानी होंगी. ईरान बिना किसी रोकटोक के अपना तेल बेच सकेगा.
होर्मुज की खाड़ी – एक नई बात
यह समझौते का एक बड़ा और नया पहलू है. होर्मुज की खाड़ी दुनिया के तेल के प्रमुख मार्गों में से एक है. यहां से हर रोज लाखों बैरल तेल गुजरता है. अब ईरान ने कहा है कि होर्मुज की खाड़ी में जो जहाज गुजरेंगे, उनसे नेविगेशन (रास्ता दिखाने), बीमा और पर्यावरण सुरक्षा जैसी सेवाओं के बदले फीस ली जाएगी. यह काम ईरान करेगा क्योंकि वह इस खाड़ी का तटीय देश है.
बाकेई ने साफ किया – यह टोल नहीं है, बल्कि सेवाओं के बदले शुल्क है. एक खास मुद्दा यह भी है कि एक तय समय तक खाड़ी से गुजरना इस बात पर निर्भर करेगा कि दूसरा पक्ष (यानी अमेरिका/इजरायल) कैसा व्यवहार करता है.
परमाणु मुद्दा और पाबंदियां – 60 दिन में बात होगी
MOU में परमाणु मुद्दे की बारीकियां नहीं हैं. बस इतना तय हुआ है कि समझौते पर दस्तखत के बाद 60 दिनों के अंदर ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दे और पाबंदियां हटाने पर अलग से बातचीत होगी. यानी यह MOU एक शुरुआत है, असली बातचीत अभी होनी है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने क्या कहा?
CNBC को दिए इंटरव्यू अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ‘दो-चरणी जांच प्रक्रिया’ होगी. होर्मुज की खाड़ी लंबे समय तक बिना टोल के खुली रहे, यह अमेरिका चाहता है. अभी कई बातें तय होनी बाकी हैं. दस्तखत की रस्म में ईरान के स्पीकर ऑफ हाउस, विदेश मंत्री और दूसरे बड़े नेता शामिल होंगे.
इजरायल को लेकर वेंस ने कहा कि इजरायल में कुछ लोग इस समझौते को पसंद करते हैं. नए मिडल ईस्ट में इजरायल की भी जगह होगी. इस हफ्ते समझौते का पूरा टेक्स्ट सार्वजनिक होने की उम्मीद है.




